रेत माफिया, डॉक्टर और ‘परफेक्ट मर्डर’ की साजिश… 2 इंच के प्लास्टिक के टुकड़े ने खोला 5 हत्याओं का राज
रेत माफिया, डॉक्टर और 'परफेक्ट मर्डर' की साजिश... 2 इंच के प्लास्टिक के टुकड़े ने खोला 5 हत्याओं का राज

मध्य प्रदेश में माफियों के हौसले किस कदर बुलंद है इसका अंदाजा जबलपुर नरसिंहपुर हाईवे में डंपर से पांच लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार देने वाली घटना से लगाया जा सकता है। सड़क पर बिखरे शव… चीख-पुकार… और तेज रफ्तार हाईवा की टक्कर। पहली नजर में यह एक दर्दनाक सड़क हादसा लगा, लेकिन नरसिंहपुर पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो कहानी पूरी तरह बदल गई। जो मामला एक्सीडेंट समझा जा रहा था वह दरअसल एक सुनियोजित हत्या की साजिश निकला। इस हत्याकांड का पर्दाफाश किसी चश्मदीद या बड़े सबूत से नहीं बल्कि घटनास्थल पर मिले महज दो इंच के टूटे हुए प्लास्टिक के अंग्रेजी अक्षर ‘A’ से हुआ।
19 जुलाई की रात थाना सुआतला क्षेत्र के इंद्रानगर के पास भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे पर समाजवादी पार्टी के श्री मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र पटेल अपने साथियों के साथ खड़े थे। तभी तेज रफ्तार हाईवा ने उन्हें कुचल दिया। हादसे में राजेंद्र पटेल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वीरेंद्र लोधी, रामपाल सिंह लोधी, जयपाल सिंह लोधी और नीरज सिंह लोधी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। आकाश सिंह लोधी गंभीर रूप से घायल हो गए।
नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि शुरुआत में इसे सड़क दुर्घटना माना गया लेकिन को घटनास्थल पर जांच के दौरान कई ऐसी बातें मिलीं, जिन्होंने पूरी कहानी बदल दी। रातभर चली जांच के दौरान सड़क पर मिला टाटा कंपनी के मोनोग्राम का टूटा हुआ अंग्रेजी अक्षर ‘A’ पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बना। इसके बाद शाहपुरा से लेकर घटनास्थल तक हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। तकनीकी जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की मदद से पुलिस हत्या में इस्तेमाल हाईवा डम्पर तक पहुंच गई, जिसे हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों से बरामद किया गया।
मृतक और घायल के नाम –
राजेंद्र पटेल (आयु लगभग 22 वर्ष)
वीरेंद्र लोधी (आयु 20 वर्ष)
रामपाल सिंह लोधी (आयु 21 वर्ष)
जयपाल सिंह लोधी (आयु 30 वर्ष)
नीरज सिंह लोधी (आयु 25 वर्ष)
इस घटना में आकाश सिंह लोधी गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनका उपचार चल रहा है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं था।बल्कि राजेंद्र पटेल की हत्या के लिए पहले से पूरी रणनीति तैयार की गई थी। पुलिस के अनुसार, राजेंद्र पटेल लगातार अवैध रेत उत्खनन और कथित रेत माफिया की गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। इसी रंजिश के चलते उनकी हत्या की साजिश रची गई। आरोप है कि मुख्य आरोपी आनंद पटेल ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजेंद्र को रास्ते से हटाने का फैसला किया।
पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वारदात वाले दिन राजा पटेल लगातार राजेंद्र पटेल की गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखे हुए था। मोबाइल के जरिए उसने मुख्य आरोपी को हर पल की जानकारी दी। इसके बाद योजना के मुताबिक दो हाईवा डम्परों को हाईवे की दोनों दिशाओं में पहले से तैनात कर दिया गया, ताकि राजेंद्र जिस तरफ दिखाई दें, उसी दिशा से उन्हें कुचल दिया जाए और पूरी घटना सड़क हादसा लगे।
आठ आरोपियों की आखिर क्या भूमिका –
आनंद पटैल (लोधी) – मुख्य साजिशकर्ता एवं हाईवा चालक,
डॉ अमित खरे – हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने की सलाह देकर साक्ष्य छिपाने में सहयोग करना,
अनुज पटैल – हाईवा में साथ रहकर वारदात में सहयोगी,
राजा पटैल – मृतक की लोकेशन और गतिविधियों की रेकी,
अरविंद पटैल – मृतक की सूचना उपलब्ध कराना,
भरत पटेल – लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी देना,
अनिल पटैल – घटना के बाद आरोपियों को शरण देना,
नरेन्द्र ठाकुर – आरोपियों को छिपाने और सहयोग करने की भूमिका,
इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में एक और चौंकाने वाला नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार जबलपुर के एक निजी अस्पताल के संचालक डॉ. अमित खरे ने घटना को सड़क दुर्घटना का रूप देने की सलाह दी और साजिश को अंजाम तक पहुंचाने में सहयोग किया। पुलिस ने उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित साजिश में उनकी भूमिका कितनी गहरी थी और हत्या की योजना कब से तैयार की जा रही थी।
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने लगातार दबिश दी। पहले भरत पटेल और अनिल पटेल को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी आनंद पटेल सहित अन्य आरोपी जंगलों में फरार हो गए। पूरी रात चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने आनंद पटेल, अनुज पटेल, अरविंद पटेल, नरेंद्र ठाकुर और डॉ. अमित खरे समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हाईवा डम्पर, महिंद्रा थार, टोयोटा फॉर्च्यूनर और कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया। इस दौरान पुलिस ने उनका जुलूस भी निकाला। मीडिया के सवालों से बचते हुए सभी आरोपी चुपचाप अदालत पहुंचे। पुलिस का कहना है कि मामले में अभी भी कई पहलुओं की जांच जारी है और यदि साजिश में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नरसिंहपुर पुलिस का दावा है कि महज छह दिनों के भीतर इस बहुचर्चित हत्याकांड की गुत्थी सुलझाकर यह साबित कर दिया गया कि जिसे सड़क हादसा बताया जा रहा था वह दरअसल एक सोची-समझी साजिश थी। पुलिस अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने में जुटी है। इस सनसनीखेज मामले ने एक बार फिर अवैध रेत कारोबार, पुरानी रंजिश और संगठित अपराध के गठजोड़ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



