जिस बेटी को सुबह स्कूल भेजा था, वो शाम तक घर नहीं लौटी… गोटेगांव की 8 साल की मासूम की मौत ने हर आंख नम कर दी
जिस बेटी को सुबह स्कूल भेजा था, वो शाम तक घर नहीं लौटी… गोटेगांव की 8 साल की मासूम की मौत ने हर आंख नम कर दी

नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में सामने आई आठ साल की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत की घटना ने पूरे इलाके को भीतर तक झकझोर दिया है। जिस बच्ची को परिवार ने रोज की तरह स्कूल भेजा था, किसी को अंदाजा नहीं था कि वह दिन उसके जीवन का आखिरी दिन साबित होगा। शाम तक जब मासूम घर नहीं लौटी तो परिवार की बेचैनी बढ़ने लगी। पहले उम्मीद थी कि शायद किसी रिश्तेदार के यहां चली गई होगी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार की चिंता डर में बदलती गई।
मासूम की तलाश में परिवार के लोग रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में भटकते रहे। गांव में भी बच्ची के लापता होने की खबर फैल गई। आखिरकार पुलिस को सूचना दी गई और झौतेश्वर पुलिस चौकी में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
बताया गया कि 5 अगस्त को बच्ची रोज की तरह स्कूल गई थी। छुट्टी के बाद पड़ोस में रहने वाला अनिल यादव उर्फ अन्नू कथित तौर पर स्कूल पहुंचा। पुलिस के मुताबिक उसने बच्ची से कहा कि उसके पिता ने उसे घर बुलाया है। मासूम ने यह बात अपने शिक्षक को बताई और अपना स्कूल बैग वहीं रखकर उसके साथ चली गई।
यह वही मासूम थी जिसे शायद भरोसा था कि सामने वाला उसे उसके पिता के पास ले जा रहा है। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया।
जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। घर से लेकर आसपास के रास्तों तक खोजबीन की गई। रिश्तेदारों से संपर्क किया गया। गांव के लोगों ने भी तलाश में मदद की। लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देश पर पुलिस की कई टीमों को तलाश में लगाया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस के साथ ग्रामीण भी तलाश अभियान में जुट गए। जंगल, खेत, पगडंडियों और आसपास के संभावित स्थानों पर सर्चिंग की गई।
डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई। एफएसएल टीम को बुलाया गया और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए भी जानकारी जुटाने का प्रयास शुरू हुआ। सैकड़ों ग्रामीण हाथों में टॉर्च लेकर बच्ची को तलाशते रहे। हर किसी की आंखों में यही उम्मीद थी कि मासूम कहीं मिल जाए और शायद सुरक्षित हो।
लेकिन करीब आठ घंटे की तलाश के बाद जो खबर सामने आई, उसने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया।
गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में पानी से भरे एक गड्ढे के पास मासूम का शव बरामद हुआ। बच्ची के शव की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम पसर गया। जिस बेटी के सकुशल लौटने की उम्मीद में परिवार घंटों से रास्ता देख रहा था, अब वह हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद पूरे गोटेगांव में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दोष साबित होने पर कठोरतम सजा की मांग शुरू कर दी। जगह-जगह विरोध और कैंडल मार्च के जरिए लोग मासूम को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, बच्ची को आखिरी बार आरोपी के साथ देखे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने अनिल यादव को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने बच्ची को जंगल ले जाने और उसकी हत्या करने की बात स्वीकार की है। हालांकि मामले में सामने आए प्रत्येक तथ्य की पुष्टि मेडिकल, फॉरेंसिक और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
मासूम के शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच रिपोर्ट को भी विवेचना में शामिल किया जा रहा है। पुलिस ने मामले में हत्या और पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
घटना के बाद लोगों में सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक गहरा डर भी है। सवाल यह है कि आखिर एक मासूम बच्ची स्कूल से निकलने के बाद इतनी दूर कैसे पहुंची? उसके साथ क्या हुआ? और वह परिवार तक सुरक्षित क्यों नहीं लौट सकी?
इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल से घर तक बच्चों की सुरक्षा, आसपास के लोगों पर नजर और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देना अब बेहद जरूरी हो गया है।
गोटेगांव के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है। आज जिस घर की बेटी नहीं लौटी, कल किसी और परिवार के सामने ऐसी परिस्थिति न आए, इसके लिए समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
परिवार की गोद सूनी है। घर में वह मासूम आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। गांव की गलियों में अब उसकी चहचहाहट नहीं सुनाई देगी। स्कूल में उसकी खाली जगह देखकर शायद उसके सहपाठियों को भी उसकी याद आएगी।
और यही इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू है—
एक बच्ची सुबह स्कूल गई थी… परिवार को भरोसा था कि वह छुट्टी के बाद दौड़ती हुई घर आएगी। लेकिन शाम को घर का दरवाजा खुला रहा और बेटी वापस नहीं आई।
अब परिवार की आंखों में सिर्फ आंसू हैं और पूरे गोटेगांव में एक ही मांग है—मामले की निष्पक्ष और तेज जांच हो, दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम सजा मिले और ऐसी घटना दोबारा किसी मासूम के साथ न हो।
क्योंकि किसी भी मासूम का बचपन डर के साये में नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में बीतना चाहिए।



