जबलपुर में टेलिग्राफ फैक्ट्री में मौत का मलबा! जर्जर दीवार गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रबंधन पर गंभीर सवाल
टेलिग्राफ फैक्ट्री में मौत का मलबा! जर्जर दीवार गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रबंधन पर गंभीर सवाल

जबलपुर। शहर के मदन महल थाना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक टेलिग्राफ फैक्ट्री परिसर में बुधवार दोपहर हुए दर्दनाक हादसे ने हड़कंप मचा दिया। फैक्ट्री के पुराने स्टोर रूम के पास कबाड़ और लोहे का सामान हटाने के दौरान अचानक एक जर्जर ईंट की दीवार भरभराकर मजदूरों के ऊपर जा गिरी। मलबे में दबने से दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 2 बजे हुआ। करीब आधा दर्जन मजदूर फैक्ट्री परिसर में कबाड़ हटाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान करीब 25 से 30 साल पुरानी और कमजोर बताई जा रही दीवार अचानक ढह गई। नीचे काम कर रहे दो मजदूर भारी मलबे के नीचे दब गए। साथी मजदूरों ने शोर मचाया और तत्काल मलबा हटाने की कोशिश की, लेकिन दोनों को बचाया नहीं जा सका।
सूचना मिलते ही मदन महल पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। मृतकों की आधिकारिक पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों जबलपुर के रहने वाले दैनिक मजदूर बताए जा रहे हैं।
हादसे के बाद गेट बंद करने का आरोप,
घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और मजदूरों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद फैक्ट्री के मुख्य गेट बंद कर दिए गए। आरोप है कि करीब एक घंटे तक पुलिस को भी परिसर के अंदर जाने के लिए इंतजार करना पड़ा।
अब सवाल यह है कि अगर हादसा महज दुर्घटना था, तो घटना के तुरंत बाद फैक्ट्री के गेट क्यों बंद किए गए? क्या प्रबंधन हादसे की जानकारी बाहर जाने से रोकना चाहता था? इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल,
मजदूरों से जर्जर ढांचे के पास कबाड़ हटाने का काम कराए जाने के दौरान सुरक्षा उपकरण, हेलमेट और इंजीनियर की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच में यह सामने आता है कि कमजोर दीवार के बारे में जानकारी होने के बावजूद मजदूरों को वहां काम पर लगाया गया था, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।
मदन महल थाना प्रभारी के मुताबिक, मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। फैक्ट्री प्रबंधन और ठेकेदार से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच रही है कि मजदूरों को किसके निर्देश पर जर्जर ढांचे के पास काम कराया जा रहा था और हादसे के बाद गेट बंद करने की वजह क्या थी।
फिलहाल फैक्ट्री परिसर में काम रोक दिया गया है और पुलिस ने घटनास्थल को जांच के दायरे में ले लिया है।
इस हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—पुरानी और जर्जर सरकारी संपत्तियों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? दो परिवारों के चिराग बुझ गए, लेकिन अब जांच यह तय करेगी कि यह महज हादसा था या लापरवाही से हुई मौत।



