Madhya Pradesh

जबलपुर में लिखित आश्वासन के बाद भी नहीं थमा आंदोलन! स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप, समाजवादी पार्टी का धरना जारी

आशीष मिश्रा और सचिन गुप्ता के नेतृत्व में अनिश्चितकालीन धरना जारी, प्रशासन पर कार्रवाई में देरी का आरोप; डॉ. आदर्श विश्नोई के मामले में ठोस कार्रवाई की मांग।

जबलपुर के घंटाघर में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर समाजवादी पार्टी और पैरेंट्स एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन ने भले ही उन्हें लिखित आश्वासन दिया हो, लेकिन जब तक धरातल पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

धरने का नेतृत्व कर रहे आशीष मिश्रा, प्रदेश सचिव, समाजवादी पार्टी एवं सचिन गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, पैरेंट्स एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश का आरोप है कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग में लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से व्यवस्था में सुधार नहीं आएगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई दिखाई भी देनी चाहिए।

धरना स्थल पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय की ओर से नवीन कोठारी पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को लिखित आश्वासन सौंपा। आश्वासन में कहा गया है कि डॉ. आदर्श विश्नोई के संबंध में निलंबन की कार्रवाई हेतु जिला कलेक्टर को पत्र भेजा जाएगा तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नई जांच समिति गठित की जाएगी।

हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इन घोषणाओं पर वास्तविक कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कथित अनियमितताओं की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से आम जनता प्रभावित हो रही है।

आशीष मिश्रा ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत विरोध का नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का आंदोलन है। वहीं सचिन गुप्ता ने कहा कि यदि प्रशासन ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

फिलहाल, प्रशासन का लिखित आश्वासन और प्रदर्शनकारियों का लगातार जारी धरना इस पूरे मामले को चर्चा का विषय बनाए हुए है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन अपने आश्वासनों को कब और किस रूप में अमल में लाता है।

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