जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के वाहन स्टैंड में अवैध वसूली का खेल! ₹10 के बाद ओवरचार्ज क्यों? किसका संरक्षण, जिम्मेदार कौन?

जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी के बीच वाहन स्टैंड को लेकर कथित मनमानी के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि निर्धारित पार्किंग शुल्क के बावजूद कुछ वाहन मालिकों से अतिरिक्त रकम मांगी जाती है। अब सवाल यह है कि आखिर यह अतिरिक्त राशि किस नियम के तहत वसूली जा रही है?
तीन घंटे के ₹10 तो फिर ओवर पैसे क्यों?
सबसे बड़ा सवाल पार्किंग शुल्क को लेकर है। यदि तीन घंटे के लिए ₹10 शुल्क निर्धारित है, तो तीन घंटे पूरे होने के बाद वाहन खड़ा रहने पर कितना अधिकृत शुल्क लिया जाना चाहिए? क्या इसके लिए कोई अलग सरकारी या अस्पताल प्रशासन की दर तय है? यदि दर तय है तो उसे स्पष्ट रूप से वाहन स्टैंड पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
रेट लिस्ट सार्वजनिक करने की जरूरत,
वाहन स्टैंड पर शुल्क को लेकर किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। तीन घंटे, छह घंटे या उससे अधिक समय के लिए कितना शुल्क लिया जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी रेट लिस्ट के माध्यम से वाहन मालिकों को मिलनी चाहिए। यदि अतिरिक्त रकम ली जा रही है तो उसकी अधिकृत रसीद भी दी जानी चाहिए।
मनमानी वसूली के आरोपों की जांच जरूरी,
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि निर्धारित रकम से अधिक पैसे मांगने को लेकर कई बार विवाद की स्थिति बनती है। कुछ मामलों में स्टैंड कर्मचारियों पर कथित बदसलूकी के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन अस्पताल परिसर में ऐसी शिकायतें सामने आना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
एंबुलेंस संचालकों की भूमिका पर भी सवाल,
मामले में प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों और ड्राइवरों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि एंबुलेंस के नाम पर मरीजों के परिजनों से अतिरिक्त रकम ली जा रही है, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। अस्पताल परिसर में एंबुलेंस और पार्किंग के लिए निर्धारित नियम क्या हैं, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
किसके संरक्षण में चल रही कथित वसूली?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्टैंड पर नियमों से अधिक रकम लिए जाने की शिकायत है, तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है? स्टैंड संचालक की जिम्मेदारी क्या है और मेडिकल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? यदि जांच में नियम विरुद्ध वसूली सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होना जरूरी है।
डीन और अधीक्षक ने लिया संज्ञान,
मामला सामने आने के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना के निर्देश पर पार्किंग संचालक को नोटिस जारी किया गया है। वहीं अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा ने मामले को संज्ञान में लेकर संचालक से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही है। अब देखना होगा कि जांच के बाद प्रबंधन का अगला कदम क्या होता है।
अब कार्रवाई की बारी,
मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए अस्पताल आते हैं। ऐसे में पार्किंग शुल्क के नाम पर यदि नियमों से अलग जाकर अतिरिक्त रकम लिए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही शुल्क व्यवस्था को पारदर्शी बनाना भी जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल—ओवरचार्ज पर कब लगेगी लगाम?
आखिर तीन घंटे के ₹10 हैं तो उसके बाद लिए जा रहे अतिरिक्त पैसे किस नियम के तहत हैं? अगर नियम है तो रेट लिस्ट सार्वजनिक क्यों नहीं? और अगर नियम नहीं है तो कथित वसूली पर कार्रवाई कब होगी? अब नजर मेडिकल अस्पताल प्रबंधन पर है कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।



