जबलपुर के सूदखोरी के आरोपों पर गढ़ा पुलिस का शिकंजा! 12 लोगों पर FIR, लाखों की वसूली के दावे से मचा हड़कंप

जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र में कथित सूदखोरी को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। शिकायतकर्ता संतोष कुनबी की शिकायत पर पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अलग-अलग लोगों से उधार ली रकम के बदले वह भारी ब्याज चुका चुका है, लेकिन इसके बावजूद उससे मूलधन और अतिरिक्त ब्याज की मांग की जा रही थी। आरोप है कि विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी भी दी जाती थी।
शिकायत में सामने आए नाम
शिकायतकर्ता संतोष कुनबी ने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, उनमें अनिल पटेल, उमेश पटेल, आशू नेल्सन, अंकुर डाबर, अजय महोबिया, सन्नी अरोरा, बंटी उर्फ रितेश श्रीवास्तव, रतन, श्रेयांश सोनी, रंजीत पटेल, पिंटू और सचिन चौकसे शामिल हैं।
लाखों रुपये ब्याज चुकाने का दावा
संतोष कुनबी का दावा है कि अनिल पटेल से लिए 5 लाख रुपये के बदले वह 3 लाख 61 हजार रुपये ब्याज दे चुका है, फिर भी 5 लाख रुपये की मांग की जा रही है। वहीं उमेश पटेल से लिए 1 लाख 75 हजार रुपये के बदले 1 लाख 68 हजार रुपये ब्याज देने के बावजूद 3 लाख 50 हजार रुपये मांगने का आरोप है।
मूल रकम से ज्यादा वसूली का आरोप
शिकायत में आशू नेल्सन पर 6 लाख रुपये के बदले 9 लाख 65 हजार रुपये वसूलने के बावजूद अतिरिक्त 6 लाख और ब्याज मांगने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह अंकुर डाबर, अजय महोबिया और सन्नी अरोरा पर भी मूल रकम से ज्यादा राशि लेने के बाद अतिरिक्त रकम मांगने के आरोप लगाए गए हैं।
कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप
संतोष कुनबी ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति से लिया ब्याज चुकाने के लिए दूसरे व्यक्ति से ब्याज पर रकम दिलाई जाती थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक इस तरह कर्ज बढ़ता गया और कथित तौर पर उसे लगातार अतिरिक्त रकम देने के लिए दबाव बनाया जाता रहा।
15 लाख के लेन-देन पर भी सवाल
शिकायत में सचिन चौकसे से करीब 15 लाख रुपये 3 प्रतिशत ब्याज पर लेने का उल्लेख है। संतोष कुनबी का दावा है कि वह 18 लाख रुपये और 2 लाख 21 हजार रुपये ब्याज के रूप में चुका चुका है, इसके बावजूद 2 लाख रुपये की और मांग की जा रही है। इस लेन-देन में मकान के संबंध में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
गढ़ा पुलिस ने गंभीरता से लिया मामला
शिकायत मिलने के बाद गढ़ा थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए BNS की धारा 296(बी), 351(3), 61(2) और मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम की धारा 4 के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और सभी लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अब पुलिस जांच में खुलेगा पूरा नेटवर्क
मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तव में कितनी रकम उधार दी गई, कितना ब्याज लिया गया और शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई रकम का लेन-देन किन परिस्थितियों में हुआ। गढ़ा पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आने की उम्मीद है।
सूदखोरी के खिलाफ पुलिस का सख्त संदेश,
इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि कर्ज और ब्याज के नाम पर यदि किसी व्यक्ति को कथित तौर पर धमकाया या परेशान किया जाता है, तो शिकायत मिलने पर पुलिस कानूनी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल गढ़ा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपों की निष्पक्ष जांच जारी है। सभी नामित व्यक्ति इस मामले में फिलहाल आरोपी हैं; आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगी।



