Madhya Pradesh

हादसा या साजिश? व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, NSCB अस्पताल में बायोमेडिकल कचरे में लगी भीषण आग, 

हादसा या साजिश? व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, NSCB अस्पताल में बायोमेडिकल कचरे में लगी भीषण आग, 

जबलपुर संभाग के सबसे बड़े नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब अस्पताल भवन के पीछे बायोमेडिकल स्टोर के बाहर रोड किनारे खुले में पड़े कचरे के ढेर में अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मेडिकल प्रबंधन की सूचना पर दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि आग अस्पताल की अन्य इमारत तक नहीं पहुंची, लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह आग लगी या लगाई गई? क्या यह महज लापरवाही का परिणाम था या फिर किसी ने जानबूझकर कचरे में आग लगाई? अस्पताल परिसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि इस तरह आग लगती है तो यह केवल एक हादसा नहीं बल्कि व्यवस्थागत खामियों की ओर इशारा करता है। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन प्रारंभिक तस्वीरें और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान कई चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
घटना के दौरान कचरे के ढेर से लगातार शीशियां फूटने और धमाके जैसी आवाजें आती रहीं। यह स्पष्ट संकेत है कि वहां सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी बड़ी मात्रा में मौजूद था। सवाल यह उठता है कि यदि जैवचिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के तहत पीले, लाल, सफेद और नीले बैग में कचरे का पृथक्करण अनिवार्य है, तो फिर खुले में मिला-जुला कचरे का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया? क्या सेग्रिगेशन की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया?
जानकारों के अनुसार मेडिकल कॉलेज से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे का निपटान नगर निगम और अधिकृत एजेंसी, यानी कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) के माध्यम से होना चाहिए। इसमें कचरे को चिन्हित वाहनों से उठाकर ऑटोक्लेविंग, सैनिटाइजेशन या इन्सिनरेशन के जरिए सुरक्षित रूप से नष्ट किया जाता है। यदि यह प्रक्रिया लागू है, तो फिर अस्पताल परिसर के पीछे खुले में इतना कचरा क्यों पड़ा था? क्या कचरा नियमित रूप से उठाया नहीं जा रहा था, या फिर जानबूझकर नियमों को दरकिनार किया गया?
अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं। ऐसे में खुले में पड़ा बायोमेडिकल कचरा संक्रमण और बीमारियों के फैलने का बड़ा खतरा बन सकता है। यदि संक्रामक कचरा आम कूड़े के साथ मिला हुआ था, तो यह सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी मौके पर जाकर निरीक्षण किया? क्या ‘ट्रेस-टू-ट्रेस’ ट्रैकिंग और बारकोड सिस्टम का वास्तव में उपयोग हो रहा है या यह केवल कागजों तक सीमित है?
यह घटना केवल आगजनी की नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा है। यदि नियमों के बावजूद बायोमेडिकल कचरा खुले में डाला जा रहा है और उसमें आग लगाई जा रही है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है, जिम्मेदारी किसकी तय होती है, और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
जबलपुर से सुनील सेन की रिपोर्ट

The Mirror MP

वेंकटेश कोरी निदेशक एवं संपादक — The Mirror MP जबलपुर में पिछले 20 से अधिक वर्षों से सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार वेंकटेश कोरी ने लोकल, रीजनल, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं डिजिटल मीडिया/वेब के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टर एवं वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्य किया है। न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग, स्क्रिप्टिंग, वॉयस ओवर, टॉक शो एवं ग्राउंड रिपोर्टिंग में व्यापक अनुभव रखने वाले वेंकटेश कोरी वर्तमान में अनेक नेशनल न्यूज़ चैनलों के लिए जबलपुर से संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। शैक्षणिक योग्यता : • डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (DCA) – माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल • बैचलर ऑफ कॉमर्स (कंप्यूटर एप्लीकेशन) (B.Com CA) • बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन (BJC) • मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) • मास्टर ऑफ फिलॉसफी (M.Phil.) • वर्तमान में मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन (MJC) की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

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