जबलपुर में एफआईआर के बाद पाठक के समर्थन में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन,शराब कारोबारी से कथित वसूली के आरोप में मामला दर्ज,

जबलपुर। शराब दुकान संचालक से कथित तौर पर रकम मांगने के मामले में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अभिषेक पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। गढ़ा पुलिस ने शराब दुकान संचालक निखिल सोनी की शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है। शिकायत में तीन शराब दुकानों से कुल 60 हजार रुपये प्रतिमाह मांगने और दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर के बाद कांग्रेस ने पाठक के समर्थन में आज शाम 4 बजे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देने और प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
शिकायत पर एफआईआर, साक्ष्यों की जांच में जुटी पुलिस-
पुलिस ने शिकायत को आधार बनाकर वैधानिक प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज की है। अब मामले में शिकायतकर्ता के बयान, कथित ऑडियो-वीडियो, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस के सामने चुनौती आरोपों की वास्तविकता को साक्ष्यों के आधार पर सामने लाने की है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि वायरल सामग्री वास्तविक है या उसमें किसी प्रकार की काट-छांट हुई है।
पाठक ने किया दावा, दुकानदार ने झाड़ा –
एक तरफ अभिषेक पाठक ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि वायरल ऑडियो को काट-छांटकर पेश किया गया और बातचीत में जिस रकम का उल्लेख है, वह शराब दुकान के किराये से संबंधित थी, न कि कथित अवैध वसूली से। वहीं दूसरी तरफ दुकानदार प्रदीप मांझी ने अभिषेक पाठक के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह टोटल ब्लैकमेलर हैं और पहले भी वह दुकानों से 20-20 हजार रुपये लेता था। दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि भी जांच में उपलब्ध साक्ष्यों से ही हो सकेगी।
पूर्व आरोपों ने बढ़ाए सवाल-
अभिषेक पाठक पर इससे पहले भी अवैध वसूली और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को कथित तौर पर धमकाने जैसे आरोप लगाए जाने की बात सामने आ चुकी है। हालांकि इन आरोपों को वर्तमान एफआईआर से अलग देखा जाना जरूरी है और आरोप मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता। फिर भी लगातार सामने आने वाली शिकायतों और आरोपों के संदर्भ में मौजूदा प्रकरण की पुलिस जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यदि पूर्व मामलों में कोई एफआईआर, जांच या न्यायिक कार्रवाई हुई है, तो उसका रिकॉर्ड भी तथ्यों की तस्वीर स्पष्ट करने में अहम होगा।
एफआईआर के बाद समर्थन में प्रदर्शन, सवाल भी उठे-
मामला दर्ज होने के बाद कांग्रेस द्वारा अपने ब्लॉक अध्यक्ष के समर्थन में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन किए जाने की घोषणा ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि एफआईआर राजनीतिक दबाव में दर्ज की गई है और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं पुलिस की कार्रवाई का आधार शिकायत और उपलब्ध साक्ष्य हैं।



